ये हिन्दोस्ताँ है हमारा वतन
मोहब्बत की आँखों का तारा वतन,
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन
वो इस के दरख़्तों के तय्यारियाँ,
वो फल फूल पौधे वो फुलवारियाँ
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन,
हवा में दरख़्तों का वो झूमना
वो पत्तों का फूलों का मुँह चूमना,
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन
वो सावन में काली घटा की बहार,
वो बरसात की हल्की हल्की फुवार
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन,
वो बाग़ों में कोयल वो जंगल के मोर
वो गंगा की लहरें वो जमुना का ज़ोर,
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन
इसी से है इस ज़िंदगी की बहार,
वतन की मोहब्बत हो या माँ का प्यार
हमारा वतन दिल से प्यारा वतन..!!
~चकबस्त बृज नारायण
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