सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी

sabhi kahe mere gamkhwar ke alawa bhi

सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करूँ यार के अलावा भी, बहुत से ऐसे

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था

wo dushman e jaan jaan se pyara

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था अब किस से कहें कोई हमारा भी कभी

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ye jo nang the ye jo naam the

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे

pabandiyo se apni nikalte wo

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे सब रास्ते खुले थे मगर हम पे वा न थे,

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो

is naaz is andaz se tum haaye

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो रोज़ एक ग़ज़ल हमसे कहलवाए चलो हो, रखना है

मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है

mugaalta hai urooz o zawal

मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है हमारी आँख के शीशे में बाल थोड़ी है, हमारे दिल में

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं

dil e nadaan ki baat thi

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं मुहब्बत स्याह रात थी और कुछ भी नहीं, आसानियों

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद

wo dard wo wafa

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद लिए दिल में तेरे क़ुर्ब की हसरत तमाम शुद, ये

रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल

riha kar mujhe yaa saja de

रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल कोई तो फ़ैसला तू सुना दे ऐ आदिल, यूँ असीरी

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो

jab bhi tum chaaho mujhe

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो,