मुबारक़ हो ! अहल ए वतन क्या ख़ूब
इज्ज़त बख्शी है आलमी अखबारों ने
सोने की चिड़िया को भी इन लोगो ने
खड़ा कर दिया भूखे नंगो की क़तारो में
खुदगर्ज़ी में आईन ए वतन बदल डाले
इन नये ज़म्हुरियत के अलमबरदारो ने
सील दिए हर लब जो थे सच बोलने वाले
दौर ए ज़म्हुरियत के ज़दीद पैरोकारो ने..!!
~नवाब ए हिन्द
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न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के…

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है

नींद रातों की उड़ा देते हैं

नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना

नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा

जिसकी ख़ातिर मैने दुनिया की तरफ़ देखा न था



















