हँस के बोला करो बुलाया करो
आप का घर है आया जाया करो,
मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर
रूप बढ़ता है मुस्कुराया करो,
हद से बढ़ कर हसीन लगते हो
झूठीं क़समें ज़रूर खाया करो,
हुक्म करना भी एक सख़ावत है
हम को ख़िदमत कोई बताया करो,
बात करना भी बादशाहत है
बात करना न भूल जाया करो,
ताकि दुनिया की दिलकशी न घटे
नित नए पैरहन में आया करो,
हम हसद से अदम नहीं कहते
उस गली में बहुत न जाया करो..!!
~अब्दुल हमीद अदम
साक़ी शराब ला कि तबीअ’त उदास है
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