भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे

bhookh chehre pe liye chaand se

भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे, इन हवाओं से

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी

jhagadna kaahe ka mere bhai

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी ये बाप दादा की सब कमाई पड़ी रहेगी, अंधेरे कमरों

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए

gam e jahan ko sharmsaar

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए वो सारी उम्र इंतिज़ार करने वाले क्या हुए ?

सरहदों पर है अपने जवानों का गम

sarhadon par hai apne

सरहदों पर है अपने जवानों का गम और बस्ती में जलते मकानों का गम, फिर से ये गंदी

आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो

aadam ki jaat ho kar ilm bisra rahe

आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो क्यूँ मज़लूम ओ गरीब को बेवजह सता रहे हो ?

आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है

aarzi taaqte tumhari hai

आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है अपने अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, तेरी रज़ा

वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर…

wahi hai wahshat wahi hai nafrat aakhir

वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब ? इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है

जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर…

jab bhi is shahar me kamre se main baahar nikla

जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला मेरे स्वागत को हर एक जेब से खंजर

एक ही धरती हम सब का घर जितना…

ek hi dharti ham sab ka ghar

एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा दुख सुख का ये जंतर मंतर जितना

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं…

wo shakhs ki main jis se mohabbat nahi karta

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा