तुम को वफ़ा से क्या मतलब है जाओ अपना काम करो
तुम को वफ़ा से क्या मतलब है जाओ अपना काम करो दिन भर भटके आवारा से अब जा
Occassional Poetry
तुम को वफ़ा से क्या मतलब है जाओ अपना काम करो दिन भर भटके आवारा से अब जा
मेरी जैसी उस की हालत कब होगी उस को जाने मुझ से मोहब्बत कब होगी उस के लिए
चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले जो मेरे जिस्म में रहता था मेरी जान
बाहर नहीं तो ख़ुद ही के अंदर तलाश कर सहरा है जिस जगह पे समुंदर तलाश कर, मुमकिन
एक ग़म ही तो यार है अपना दिल जो उन पर निसार है अपना, हम तो कब के
हिज्र की शब नाला ए दिल वो सदा देने लगे सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे,
रो रहा था मैं भरी बरसात थी हाल क्या खुलता अँधेरी रात थी, मेरे नालों से है बरहम
कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते, लहू था तमन्ना
फूलों का कुंज ए दिलकश भारत में एक बनाएँ हुब्ब ए वतन के पौधे इस में नए लगाएँ,
मेंरी सदा है गुल ए शम् ए शाम ए आज़ादी सुना रहा हूँ दिलों को पयाम ए आज़ादी,