यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है
यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है कच्ची उम्रों में मगर तजरबा कम होता है,
Occassional Poetry
यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है कच्ची उम्रों में मगर तजरबा कम होता है,
हर्फ़ ए रंजिश पे कोई बात भी हो सकती है ऍन मुमकिन है, मुलाक़ात भी हो सकती है,
दिल में जो था वो हो गया मुझ को सुना के चुप सुन कर हुआ हूँ उस को
ये मेरा दिल कहाँ है अब तुम्हारी राजधानी है मेंरे दिल पर तुम्हारे दर्द ओ ग़म की हुक्मरानी
ये इश्क़ के सताए करेंगे लड़ाई ख़ाक घर फूँक के किया है तमाशा उड़ाई ख़ाक, हम से जो
तू क्या जाने रूह भी ज़ख़्मी होती है जब लफ़्ज़ों से दहशत गर्दी होती है, आ जाता है
जो भी मिले क़ुबूल है दें हाँ या न जवाब देखें मेंरे सवाल का देंगे वो क्या जवाब,
आँखों से मेरे ख़्वाब चुराती रही है रात ख़ुद भी जगी है मुझको जगाती रही है रात, आँखें
दिल भी जलाया उस ने जो मेरा जलाया ख़त अफ़सोस मैं ने जा के उसी को पढ़ाया ख़त,
सच कहने से यार ख़फ़ा हो जाते हैं दिल के सब अरमान हवा हो जाते हैं, हद से