दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं

dil me ab yun tere bhule hue

दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं,

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं

tumhari yaad ke jab zakhm bharne

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं, हदीस ए यार

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं

kab yaad me tera sath nahin

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं सद शुक्र कि अपनी रातों में

किसी और ग़म में इतनी ख़लिश ए निहाँ नहीं है

kisi aur gam me itni khalish e nihan

किसी और ग़म में इतनी ख़लिश ए निहाँ नहीं है ग़म ए दिल मेरे रफ़ीक़ो ग़म ए राएगाँ

आँधी चली तो नक़्श ए कफ़ ए पा नहीं मिला

aandhi chali to naksh e qaf e paa

आँधी चली तो नक़्श ए कफ़ ए पा नहीं मिला दिल जिस से मिल गया वो दोबारा नहीं

कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे

kabhi jhidki se kabhi pyar se

कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे हम गई रात पे दिल को लिए बहलाते रहे, अपने

सीने में ख़िज़ाँ आँखों में बरसात रही है

sine me khizaan aankhon me

सीने में ख़िज़ाँ आँखों में बरसात रही है इस इश्क़ में हर फ़स्ल की सौग़ात रही है, किस

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की

is qadar musalsal thi shiddaten

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की, वर्ना अब

ये शहर सेहर ज़दा है सदा किसी की नहीं

ye shahar sehar zada hai

ये शहर सेहर ज़दा है सदा किसी की नहीं यहाँ ख़ुद अपने लिए भी दुआ किसी की नहीं,

यूँ ही राह ए वफ़ा की सलीब पर दो क़दम उठाने के शुक्रिया

yun hi raah e waafa kee salib par

यूँ ही राह ए वफ़ा की सलीब पर दो क़दम उठाने के शुक्रिया बड़ा पुर खतर है ये