हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे

hazar ranj ho dil laakh dard mand rahe

हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे ख़याल पस्त न हो हौसला बुलंद रहे, ग़म ए फ़िराक़

दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती

dalayel se khuda tak aql e insani nahin jaati

दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती वो एक ऐसी हक़ीक़त है जो पहचानी नहीं जाती,

तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी

tum se vabasta hai meri maut meri zindagi

तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी जिस्म से अपने कभी साया जुदा होता नहीं, इस तरह

ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते

ye tujh se aashna duniya se begaane kahan jaate

ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते तेरे कूचे से उठते भी तो दीवाने कहाँ जाते,

ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता

khuda jab tak na chahe aadmi se kuch nahin hota

ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता मुझे मालूम है मेरी ख़ुशी से कुछ नहीं

किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता

kise apna banayen koi is qaabil nahin milta

किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, मोहब्बत

दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता

duee ka tazkira tauhid me paya nahi jaata

दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता जहाँ मेरी रसाई है मेरा साया नहीं जाता, मेरे टूटे

एक बिखरते आशियाँ की बात है

ek bikharte aashiyaan kee baat hai

एक बिखरते आशियाँ की बात है एक शिकस्ता साएबाँ की बात है, मेरे माथे के निशाँ की बात

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी

ab izazat de ki main hoon jaan ba lab ae zindagi

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी मौत आती है बस अब हद्द ए

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

main ne dekha hai kaisa ye sapna naya raat ke is pahar

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर मुझ से बिछड़ा हुआ कोई अपना