दिल धड़कने का सबब याद आया

dil dhadkane ka sabab yaad aaya

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ

निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं

niyyat e shauq bhar na jaaye kahin

निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं तू भी दिल से उतर न जाए कहीं, आज देखा है

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ ?

naye kapde badal kar jaaoon kahan

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए ? वो शख़्स तो शहर ही

कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले

kuch is ada se gam e zindagi ke saath chale

कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले कि जैसे कोई किसी अजनबी के साथ चले,

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए

aaraaeesh e bahaar ka saamaan kahan se aaye

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए

kya kya na saamne se zamane guzar gaye

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए,

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?

kaun kahta hai ki pee kar door ho jate hai gam

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और

वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है

wo hans dete hai jab mahfil me mera naam aata hai

वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है

suna hai jab se ki tum ko bhi gam gavara hai

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है,

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है

hum ahal e dil ka samajhiye qarar baaqee hai

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही