दिल धड़कने का सबब याद आया
दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ
Occassional Poetry
दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ
निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं तू भी दिल से उतर न जाए कहीं, आज देखा है
नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए ? वो शख़्स तो शहर ही
कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले कि जैसे कोई किसी अजनबी के साथ चले,
आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ
क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए,
कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और
वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम
सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है,
हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही