गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है

gareban dar gareban nuqta

गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है बहार आए तो दीवानों की रुस्वाई भी होती है, हम

इस नहीं का कोई इलाज नहीं

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इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं, कल जो था आज वो मिज़ाज

जो दिख रहा है उसी के अंदर जो…

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जो दिख रहा है उसी के अंदर जो अनदिखा है वो शायरी है, जो कह सका था वो

बूढ़ा टपरा टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच

बूढ़ा टपरा टूटा छपरा

बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ?

गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने

गँवाई किस की तमन्ना

गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने, तेरा

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो एक और ज़ख्म खा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारे आरिज़

पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा

पानी के उतरने में

पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा हालात सँवरने में अभी वक़्त लगेगा, मच्छर से, कोरोना से अभी

फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें

फ़सुर्दगी का मुदावा करें

फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें वो लोग जो तेरे क़ुर्ब ए जमाल से भी डरें, एक

एक जाम खनकता जाम कि साक़ी…

एक जाम खनकता जाम

एक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है एक होश रुबा इनआ’म कि साक़ी रात गुज़रने

दूर तक छाए थे बादल और कहीं..

door tak chhaye the

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न