सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे

sach bolne ke taur tarike nahi rahe

सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे, वैसे तो हम

हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है

हर गम से मुस्कुराने

हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है ये दिल ही तो है जो गिरता और संभलता है,

एक ही धरती हम सब का घर जितना…

ek hi dharti ham sab ka ghar

एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा दुख सुख का ये जंतर मंतर जितना

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है

duniya jise kahte hai

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है,

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं…

wo shakhs ki main jis se mohabbat nahi karta

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो…

wo dil hi kya tere milne ki jo duaa na kare

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ

उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना

use mana kar gurur us ka badha na dena

उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना वो सामने आए भी तो उस को सदा न

नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है

nek logo me mujhe nek gina jaata hai

नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है गुनाहगार गुनाहगार समझते है मुझे मैं तो ख़ुद बाज़ार में

दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है

dil soz se khaali nigah paaq nahi hai

दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है फिर इसमें अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है,

अफ़लाक से आता है नालों का जवाब…

aflaq se aata hai naalo ka jawab aakhir

अफ़लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर, अहवाल ए