अब भला छोड़ के घर क्या करते…

ab bhala chod ke ghar kya karte

अब भला छोड़ के घर क्या करते शाम के वक़्त सफ़र क्या करते, तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं अपने

तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद

tune dekha hai kabhi ek nazar shaam ke baad

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद,

हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें

haadso ki zad me hai to muskurana chhod de

हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें

अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं

anokhi vazaa hai saare jahan se nirale hai

अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं ये आशिक कौन सी बस्ती के या रब ! रहने

अजब वायज़ की दींदारी है या रब !

azab wayaz ki deedari hai ya rab

अजब वायज़ की दींदारी है या रब ! अदावत है इसे सारे जहाँ से, कोईअब तक न यह

दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही…

darog ke imtihan kade me sada yahi

दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही कारोबार होगा जो बढ़ के ताईद ए हक़ करेगा वही सज़ावार

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस

milna na milna ek bahana hai aur bas

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस,

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

sukhan vari ka bahana banaata rahta hoon

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से

मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी…

masrufiyat usi ki hai fursat usi ki hai

मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी की है इस सरज़मीन ए दिल पे हुकूमत उसी की है, मिलता

जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी…

jisko gurur aaj hai yaa taajwari ka

जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी का कल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का,