ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए

ba naam e koocha e dildar gul barse ki sang aaye

ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए हँसा है चाक ए पैराहन न क्यूँ

जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं

jalwa e gul ka sabab deedaa e tar hai ki nahi

जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं मेरी आहों से बहाराँ की सहर है

अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे

adaa e tool e sukhan kya wo ikhtiyaar kare

अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे जो अर्ज़ ए हाल ब तर्ज़ ए निगाह ए

वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए

wo to gaya ye deeda e khoon baar dekhiye

वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए, दिखला

डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को

dara ke mauj o talatum se hum nasheeno

डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, जमाल

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

aakhir gam e jaanaan ko ae dil badh kar gam e dauraan hona tha

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी

musalsal mujh pe ye teri inayat maar dalegi

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए

आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला

aa hi jayegi sahar matla e imkaan to khula

आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला न सही बाब ए क़फ़स रौज़न ए ज़िंदाँ तो

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए

is baag me wo sang ke qaabil kaha na jaaye

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है

khanzar kee tarah boo e saman tej bahut hai

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है,