होंठों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है
होंठों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है वहशत बड़े दिलचस्प दो राहे पे खड़ी है, दिल
Love Poetry
होंठों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है वहशत बड़े दिलचस्प दो राहे पे खड़ी है, दिल
वो है बहुत हसीन और फिर उर्दू बोला करती है मेरे घर के सामने छत पर अक्सर टहला
कहिए ऐसी बात जो दिल में लगा दे आग सी क्या भला होगा किसी का दास्तान ए तूर
जिस ने बख़्शी है फ़ुग़ाँ उस को सुना भी न सकूँ कैसा नग़्मा है जिसे साज़ पे गा
किया हम ने जो उन से कुछ ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता उन्हों ने भी दिया हम को जवाब आहिस्ता
साया ए ज़ुल्फ़ नहीं शोला ए रुख़्सार नहीं क्या तेरे शहर में सरमाया ए दीदार नहीं, वक़्त पड़
दास्तानों में वो जादू है न तफ़सीरों में है जो तेरी आँखों की बेआवाज़ तक़रीरों में है, राएगाँ
ख़ुश्बू मेंरे बदन में रची है ख़लाओं की मैं सैर कर रहा हूँ अभी तक फ़ज़ाओं की, मत
फूलों की है तख़्लीक़ कि शोलों से बना है कुंदन सा तेरा जिस्म जो ख़ुश्बू में बसा है,
पड़ा हुआ मैं किसी आइने के घर में हूँ ये तेरा शहर है या ख़्वाब के नगर में