मेरी जैसी उस की हालत कब होगी

meri jaisi us ki

मेरी जैसी उस की हालत कब होगी उस को जाने मुझ से मोहब्बत कब होगी उस के लिए

चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले

chalo tum ko milata

चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले जो मेरे जिस्म में रहता था मेरी जान

बाहर नहीं तो ख़ुद ही के अंदर तलाश कर

bahar nahi to khud

बाहर नहीं तो ख़ुद ही के अंदर तलाश कर सहरा है जिस जगह पे समुंदर तलाश कर, मुमकिन

एक ग़म ही तो यार है अपना

ek gam hi to

एक ग़म ही तो यार है अपना दिल जो उन पर निसार है अपना, हम तो कब के

हिज्र की शब नाला ए दिल वो सदा देने लगे

hizr ki shab naala

हिज्र की शब नाला ए दिल वो सदा देने लगे सुनने वाले रात कटने की दुआ देने लगे,

कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते

kahan tak zafa husn

कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते, लहू था तमन्ना

सहर जब मुस्कुराई तब कहीं तारों को नींद आई

sahar jab muskuraai tab

सहर जब मुस्कुराई तब कहीं तारों को नींद आई बहुत मुश्किल से कल शब दर्द के मारों को

न तो उस्लूब न अंदाज़ गिराँ गुज़रा है

naa to usloob na

न तो उस्लूब न अंदाज़ गिराँ गुज़रा है उस पे मेरा फ़न ए परवाज़ गिराँ गुज़रा है, ये

वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बाद

wo har muqam se

वो हर मक़ाम से पहले वो हर मक़ाम के बाद सहर थी शाम से पहले सहर है शाम

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं

haadse zist ki tauqeer

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे