काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया

काँटो का एक मकान

काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया एक फूल सा निशान मेरे पास रह गया, सामान तू

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी…

use bechain kar jaaoounga

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी, मुझे छूने की ख़्वाहिश कौन करता

ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए

khwab ka rishta haqiqat

ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए आईना है इसे पत्थर से न तोड़ा जाए, अब भी

मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ

main jab bhi koi achhuta

मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ तो पहले एक गज़ल तेरे नाम लिखता हूँ, बदन की

कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ

कुछ ग़म ए जानाँ

कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ दोनों मेरी ज़ात के नाम एक ग़ज़ल मंसूब है उससे

यूँ बे दर्द बन कर ना रहा कीजिए…

yun bedard ban kar

यूँ बेदर्द बन कर ना रहा कीजिए मेरे मर्ज़ की भी तो कोई दवा कीजिए, आप मुहब्बत लिए

कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में…

kuch-adhuri-hasraten

कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में बह गए क्या कहें इस दिल की हालत, शिद्दत ए गम

तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ….

तुम्हे पूजता था दीया

तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ तुम्हारे बिना भी दुनियाँ बसा दूँ, सुनो इश्क़ में अब यही

तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार….

tumhare-hizr-me-hai

तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार बरसो से तुम्हे मालूम क्या तुम हो समन्दर पार बरसों से, चले

राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल…

rahat-e-jaan-se-to

राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल अच्छा है उस ने पूछा तो है इतना तेरा