निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ

niraala azab nakchadha aadmi

निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ जो तुक की कहो बेतुका आदमी हूँ, बड़े आदमी तो बड़े चैन से

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

de rahe hain jis

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी क्या कहूँ तुम से कि है कितना हरामी आदमी,

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ

ye mat puchho ki

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ करोगे याद, ऐसा आदमी हूँ, मेरा नाम ओ नसब क्या पूछते

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

us ke dushman hai

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना

राहज़न आदमी रहनुमा आदमी

raahjan aadmi rahnuma aadmi

राहज़न आदमी रहनुमा आदमी बार हा बन चुका है ख़ुदा आदमी, हाए तख़्लीक़ की कार पर्दाज़ियाँ ख़ाक सी

कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं

kahani thik banti hai

कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं अमूमां वक़्त अच्छा हो तो सारे ठीक मिलते हैं, वजह

सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें

subah ke dard ko

सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें किस के घर जाएँ कि इस वादा शिकन को

लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम

laakh aawara sahi shahron

लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम लाश ये किस की लिए फिरते हैं इन हाथों पे

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है

samne rah kar na

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है इस कहानी में इज़ाफ़ी तज़्किरा मेरा भी है, बे

आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी

aahan me dhalti jayegi

आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी फिर भी ग़ज़ल सुनाएगी इक्कीसवीं सदी, बग़दाद दिल्ली मास्को लंदन के दरमियाँ