सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ

sadaqaton ko ye zidd

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ जो शय कहीं न मिले मैं कहाँ तलाश करूँ ?

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे

yahan jo zakhm milte

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे तुम्हारे शहर के सब लोग तो दुश्मन नहीं

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज

घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से

ghutan bhi dekh rahi

घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से, सज़ा

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने

is mitti ko aise

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने, जो सोचा

इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की

isi liye to nahin

इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की ख़ुदा की ज़ात से मुश्किल है ज़ात आदमी की, नए

निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ

niraala azab nakchadha aadmi

निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ जो तुक की कहो बेतुका आदमी हूँ, बड़े आदमी तो बड़े चैन से

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

de rahe hain jis

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी क्या कहूँ तुम से कि है कितना हरामी आदमी,

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ

ye mat puchho ki

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ करोगे याद, ऐसा आदमी हूँ, मेरा नाम ओ नसब क्या पूछते

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

us ke dushman hai

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना