वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है

वो जो दिख रहा

वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है वो जो तुम कहते हो हक़

संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है

sangdil kahan kisi ka

संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है ये मुर्दा ज़मीर कब मज़लूमो से प्यार करते है, ना फ़िक्र

जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है

जो पूछती हो तो

जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है रात खैरात की, सदके की सहर होती है,

आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो

aankh me paani rakho

आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो, राह के

ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है

ye aasmaa zaruri hai to

ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है ज़िन्दगी के वास्ते कुछ कमी भी ज़रूरी है, हर

चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे

चेहरा देखें तेरे होंठ

चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे दिल पे आँखे रखे और तेरी साँसे देखें, सुर्ख लबो से

न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है

न नींद और न

न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है कि तुझे देख कर हसरत पूरी करनी है, किसी

अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी

azib khwab tha uske badan

अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी वो एक परी जो मुझे सब्ज़ करने आई थी, वो

बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है

bade bade shaharo ki

बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है ऊँची इमारतें और छोटे छोटे इन्सान है, अहल ए शहर

काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था

kaali raat ke sahraao me

काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था जिस ने शहर की दीवारों पर पहला ना’रा लिखा