याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए

yaad e maazi me jo khud k

याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए उस से बेहतर है कि हर बात भूला

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा

insaaf se na mahrum

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा दुनियाँ में जो जैसा करेगा, वो वैसा ही भरेगा, कागज़

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर

khoon se likhta hai taavij e azal

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर वक़्त करता है अजब सिफली अमल काग़ज़ पर, रंज

कोई आहट कोई सरगोशी…

koi aahat koi sargoshi sada kuch bhi

कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं घर में एक बेहिस ख़मोशी के सिवा कुछ भी नहीं,

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं

mat bura usko kaho

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़

zindagaani ke kaam ek taraf

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़ अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़, हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़ साज़ो सामां

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं

rishton ke jab taar uljhane l

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में

हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है

haris dil ne zamana kaseer

हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है किसी ने जिस्म किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशीरत

असर उसको ज़रा नहीं होता

asar usko zara naho hota

असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत फिज़ा नहीं होता, बेवफा कहने की शिकायत है तो भी वादा

बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का

buland darza hai duniyan me maan baap ka

बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का इनके जैसा तो कोई और प्यारा नहीं, इतने एहसान है