आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है
आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी संगदिल आ भी जा अब ख़ुदा
Life Poetry
आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी संगदिल आ भी जा अब ख़ुदा
आज फिर गर्दिश ए तक़दीर पे रोना आया दिल की बिगड़ी हुई तस्वीर पे रोना आया, इश्क़ की
ग़म ए आशिक़ी से कह दो रह ए आम तक न पहुँचे मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत तेरे
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया ? यूँ तो
मेरे हमनफ़स मेरे हमनवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे मैं हूँ दर्द ए इश्क़ से जाँ
गुलों में रंग भरे बाद ए नौ बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले, क़फ़स
दिल ए नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है ? हम हैं मुश्ताक़
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के
कोई समझेगा क्या राज़ ए गुलशन जब तक उलझे न काँटों से दामन, यक ब यक सामने आ
साक़िया तू ने मेरे ज़र्फ़ को समझा क्या है ज़हर पी लूँगा तेरे हाथ से सहबा क्या है