अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था
अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था, चलो हमी
Life Poetry
अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था, चलो हमी
अल्फ़ाज़ नर्म हो गए लहजे बदल गए लगता है ज़ालिमों के इरादे बदल गए, ये फ़ाएदा ज़रूर हुआ
वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है मियाँ ले लो जो क़ीमत आ रही है, मैं उस से इतने
जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है हँसी ज़ब्त करने को जी चाहता है, जहाँ इश्क़ में डूब
आँख से आँख मिलाता है कोई दिल को खींचे लिए जाता है कोई, वाए हैरत कि भरी महफ़िल
न मिलता ग़म तो बर्बादी के अफ़्साने कहाँ जाते अगर दुनिया चमन होती तो वीराने कहाँ जाते ?
ये दुनिया है यहाँ दिल को लगाना किस को आता है हज़ारों प्यार करते हैं निभाना किस को
बदले बदले मेरे ग़म ख़्वार नज़र आते हैं मरहले इश्क़ के दुश्वार नज़र आते हैं, कश्ती ए ग़ैरत
कैसे कह दूँ की मुलाक़ात नहीं होती है रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है, आप लिल्लाह
ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार