हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो
Life Poetry
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना,
लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला फूलों के रस में चाँद की किरनें मिला के
उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं
हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल ज़िंदगी ही ज़िंदगी है आज कल, ग़म का हर
दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है, दफ़्न कर दो हमें
वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा
रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम मौसम ए गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम,
मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन