जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ

jashn e gam haa e dil manata hoon

जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ चोट खाता हूँ मुस्कुराता हूँ, हादसों से गुज़रता जाता हूँ

मुद्दत हुई अपनी आँखों को

muddat hui apni aankhon ko

मुद्दत हुई अपनी आँखों को क्यों अश्क फ़िशानी याद आई ? क्या दिल ने उन्हें फिर याद किया

पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख

poshida sab kee aankh se dil kee kitab rakh

पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख मुमकिन हो गर तो ज़ख़्म के बदले गुलाब रख,

जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद

jab bhi khalwat me meri shama jali shaam ke baad

जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद दिल के दरवाज़े पे दस्तक सी हुई शाम

तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ

tadap raha hai dil e be qarar aa jaao

तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ बस एक बार ऐ जान ए बहार आ जाओ,

ज़िंदगी भी अजब तमाशा है

zindagi bhi azab tamasha hai

ज़िंदगी भी अजब तमाशा है कभी आशा कभी निराशा है, जिस में करती हैं गुफ़्तुगू आँखें वो मोहब्बत

ज़िक्र होता है उस परी वश का

zikr hota hai us pari vash ka

ज़िक्र होता है उस परी वश का जब भी महफ़िल में बात होती है, उस की यादों की

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो

apne ghar ke dar o deewar ko ooncha na karo

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो,

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

gurub e shaam hi se khud ko yun mahsus karta hoon

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दीया हूँ और हवा

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

bichhadte daamno me phool kee kuch pattiyan rakh do

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक