जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं

janab e aali bichhadne kee koi baat nahi

जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं हमारे सीने में एक दिल है पाँच सात नहीं, बहुत

रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर

rakha nahi tha tu ne mera dil sambhal kar

रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर अब कुछ न कर सकेगा लिहाज़ा मलाल कर, रक़्साँ

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है

tu_to_tanha_sar_e_bazar-nikal-jaata-hai

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है देखते देखते माहौल बदल जाता है, तुम ने हर

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे

aankh se kaise kahoon ab bhi andhera dekhe

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे मुद्दतें बीत गईं धूप का जल्वा देखे, दो गिलासों में

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त

zindagi aise chal rahi hai dost

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त जैसे मय्यत निकल रही है दोस्त, आज जाना है ग़म की महफ़िल

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में

wo aa ke baithe the jis waqt aashiyaane me

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में अमीर झाँक रहे थे ग़रीब ख़ाने में, हज़ार क़ाफ़िले

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ

chashm dekhoon na main us kee na hee abroo dekhoon

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम

sharmindagi me umr basar kar rahe hai hum

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम, पीना

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए

hum ek roz us ko bhulaane nikal gaye

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए जब आए लौट कर तो ज़माने निकल गए, एक शख़्स

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की

rah rah ke yaad aati hai us sharmsaar kee

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि