घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती
घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती आसरे उम्मीद के मुमकिन है ज़िन्दगी चलती रहती, हुस्न
Life Poetry
घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती आसरे उम्मीद के मुमकिन है ज़िन्दगी चलती रहती, हुस्न
क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर ख़ामखा हैरान होंगे एक समन्दर देख कर, ये अमीरों
हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है खैर छोड़ो ! अब तो इन्सान लेते है, इश्क़ ने ऐसी
खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है जमाना तेरा मेरे मौला कमाल करता है, भूले से भी
अमीरों को मिलती है हर जगह इज्ज़त ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ इज्ज़त पाने देती है, झोलियाँ
आ जाओ मैं लोरी गा के सुना देता हूँ चाँद अपना है उसे छत पे बुला लेता हूँ,
दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे भरे पेट वाले अब भूखो पे वार करेंगे, वतन में क़त्ल ए
हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िन्दगी तो कोई बद्दुआ लगे है मुझे,
हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है मुश्किल से मिले वो जो परेशान नहीं है, हर शख्स
हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे ये शहर मुझको तो यारो कोई भँवर सा लगे,