ख़्वाब में मंज़र रह जाता है

khwab me manzar rah jaata hai

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

umr bhar chalte rahe hum waqt kee talwar par

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर,

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे

kashtee havas hawaaon ke rukh par utaar de

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त

हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर

har chauk pe bhashan hai har manch pe qasam ka shor

हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर पर रोटी की कतार में आज भी

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में

raqs karne ka mila huqm jo dariyaaon me

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में,

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

jis taraf chahoon pahunch jaaoon masafat kaisi

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों

यकुम जनवरी है नया साल है

yakum janvari hai naya saal hai

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है ? बचाए ख़ुदा शर की ज़द

मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा

main usse juda wo mujh se juda

मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा ये दोनों बातें एक सी हैं, आकाश में चाँद भी तारे भी

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग

vallah kis junoon ke sataye hue hai log

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग, ये तिश्नगी

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया

sahar ne masarrat ka nagma sunaya

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया फ़ज़ा ने गुलिस्ताँ का दामन सजाया, हवाओं ने अख़्लाक़ का गीत गाया