तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई
तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच
Gazals
तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच
वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न
जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया कभी अपने ही दिल से बातें
तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई शब ए फ़िराक़ है या तेरी जल्वा आराई, तू किस
कौन उस राह से गुज़रता है दिल यूँही इंतिज़ार करता है, देख कर भी न देखने वाले दिल
देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर, तन्हा तन्हा फिरते हैं दिल वीराँ आँखें
तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें कहो तो क्यूँ न अभी से कुछ एहतिमाम
शहर सुनसान है किधर जाएँ ख़ाक हो कर कहीं बिखर जाएँ रात कितनी गुज़र गई लेकिन इतनी हिम्मत
गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें
तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती