मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे
मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे फिर तुम्हारे साथ सफ़र की इब्तिदा क्या करना ? वैसे
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मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे फिर तुम्हारे साथ सफ़र की इब्तिदा क्या करना ? वैसे
दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं, मुँह बनाता है बुरा क्यूँ वक़्त ए
मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं, इसलिए अब मैं
पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है, एक
जब से तेरा ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, आप पर दिल ये आ
ये तमन्ना थी कि तकमील ए तमन्ना करते सामने तुझ को बिठा के हम तेरी पूजा करते, कुछ
खींच कर रात की दीवार पे मारे होते मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते, यार ! क्या
उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी
हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से लोग वाक़िफ़ हों नई तकनीक से, इल्म से रौशन तो है
मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं रो ही पड़ा हूँ कभी न रोने वाला मैं, क्या