सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले…

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सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़

न जिस्म साथ हमारे

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े

चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है

chalo wo ishq nahi

चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है पर क्या करें हमें एक दूसरे की आदत है, तू

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है…

मेरे दिल में जब कोई

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है तुम क्या जानो मेरा कैसा हाल होता है, मेरी हर

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ…

ye kab chaha ki main

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला…

शख्सियत ए लख्त ए

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका ज़न्नत के धनी क़दमों को मैं सहला न सका, दूध

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है…

gamo ka sailab aya zarur hai

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर

लिख लिख के आँसुओं

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर

जो नेकी कर के फिर दरिया में…

jo neqi kar ke dariya

जो नेकी कर के फिर दरिया में उसको डाल जाता है वो जब भी दुनिया से जाता है

कुछ परिंदों को तो बस दो चार…

kuch parindo ko to

कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिए कुछ को लेकिन आसमानों के खज़ाने चाहिए, दोस्तों का