तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ
सुलझे मेरी क़िस्मत की पहेली तो बताऊँ,
आने से तेरे पहले ख़बर दे दी हवा ने
आँखों पे मेरे रख तू हथेली तो बताऊँ,
महके हैं तेरे जिस्म की ख़ुशबू से फ़ज़ाएँ
नाराज़ न हों चम्पा चमेली तो बताऊँ,
क्यों तेरे मुक़द्दर में नहीं मेरी मोहब्बत
दिखलाए तू बेरंग हथेली तो बताऊँ,
वीरानियाँ तन्हाइयाँ मौसम है ख़िज़ाँ का
अनवार करो दिल की हवेली तो बताऊँ,
चेहरे पे मेरे राज़ टटोला न करो तुम
हमराज़ बने आँख नशीली तो बताऊँ,
इज़हार ए मोहब्बत की तलब दिल में लिए हूँ
तन्हा जो मिले तेरी सहेली तो बताऊँ,
आँखों में तेरी याद कहीं ज़ख़्म न कर दे
निकले ये अगर फाँस नुकीली तो बताऊँ..!!
~चाँद अकबराबादी
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