गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है
एक ये चंचल सी हवा और अँधेरी रात,
कौन बेगाना है और कौन मेरा अपना है
सब का अंदाज़ है यकज़ा और अँधेरी रात,
मौत तो बर हक़ है एक दिन आनी है
महव ए गुफ़्तार हूँ ख़ुद से और अँधेरी रात,
मंज़िल की तरह खफ़ा आज की शब चाँद भी है
गवाह फ़लक के है बादल और अँधेरी रात,
तुम तो क्या मेरी ज़ात भी मेरी तलाश में है
मगर गुमशुदा अयनी नवाब है और अँधेरी रात..!!
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