जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे
तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे,
मैं ने एक फ़स्ल उगा रखी है दर्द ए दिल की
मेरी आँखों में क़ज़ा बदलियाँ महफ़ूज़ रखे,
बादबाँ खोल दिया हम ने फ़लक को कह दो
आँधियाँ वाँधियाँ ये बिजलियाँ महफ़ूज़ रखे,
दश्त ओ सहरा में रखे इश्क़ को ज़िंदा जो वो
शहर के बीच में वीरानियाँ महफ़ूज़ रखे,
जब क़फ़स दे ही दिया है मेरी क़िस्मत में तब
वहशत ए इश्क़ से ये तीलियाँ महफ़ूज़ रखे..!!
~चंद्रशेखर पाण्डेय शम्स
क्या अंधेरा है क्या उजाला है
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