एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ

एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ
वो शख्स मेरा हो कर भी मेरा नहीं हुआ,

आज भी ये याद करते हुए रोता हूँ
क्यूँ किसी और का हुआ और मेरा नहीं हुआ ?

यादें बहुत हसीन थी हमारे सफ़र की
न जाने क्यूँ वो मेरा हमसफ़र नहीं हुआ ?

बहुत कोशिश की के जी लूं उसके बगैर
पर न जाने क्यूँ मुझ से सब्र नहीं हुआ..!!

~अज्ञात

दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं

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