रस्ते में अजब आसार मिले

रस्ते में अजब आसार मिले
जूँ कोई पुराना यार मिले,

जिस तरह कड़कती धूपों में
दो जिस्मों को दीवार मिले,

जिस तरह मुसाफ़िर गाड़ी में
एक रिश्ते की महकार मिले,

जिस तरह पुराने कपड़ों से
एक चूड़ी खुशबू दार मिले,

जिस तरह अँधेरे खेतों में
एक रुत मशअ’ल बरदार मिले,

जिस तरह कोई हँसमुख बालक
जिस तरह ग़सीली नार मिले,

जिस तरह इकहरे भादों से
एक पानी की बौछार मिले,

जूँ एक सीपी में ला’ल पड़े
जूँ मोती दजला पार मिले,

जूँ घाव भरे नासूर सा एक
जूँ सपनों को चहकार मिले,

जिस तरह यतीमी को आमिर
एक भरा पुरा संसार मिले..!!

~आमिर सुहैल

एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ

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