सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है…

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है
हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता है,

जहाँ बागों की डाली पर बरसना छोड़ दे बादल
वहाँ बाग़ो की रखवाली पे माली हार जाता है,

जो कर लेते है सौदे खुदगर्ज़ अपने ज़मीरो के
तो लोटे जीत जाते है, खिलाड़ी हार जाता है,

यकीन जिसको हो इंसाफ़ ए ख़ुदा पर देखा है मैंने
जहाँ में मात खा कर भी वो बाज़ी मार जाता है..!!

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