किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा

kisi ke zakhm par

किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा ?

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है

ye hai to sab

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग

मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है

meri baahon pe teri

मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है मैं ये समझा कि बियाबाँ में बहार आई है नाम

मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए

mile ham kabhi to

मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए मैं सवाल भूल जाऊं तू जवाब भूल जाए, तू

संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे

sansar se bhaage firte

संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे इस लोक को भी अपना न सके उस

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में

tanhaai se hai sohbat

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में क्या ख़ूब गुज़रती है औक़ात जुदाई में, रुख़्सत हो चला

कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

kamar baandhe hue chalne

कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे

अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और

ab ishq tamasha mujhe

अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और कहता हूँ कुछ और मुँह से निकल जाए है कुछ

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं

Baithe to paas hai

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं जी लगा है पर अभी हाथ लगा सकते नहीं,

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता

barahm kabhi qasid se

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता गर नाम हमारा सर ए मक्तूब न होता, ख़ूबान ए