ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे

ye shishe ye sapne

ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे किसे क्या ख़बर है कहाँ टूट जायें ? मुहब्बत के

वो है बहुत हसीन और फिर उर्दू बोला करती है

wo hai bahut haseen

वो है बहुत हसीन और फिर उर्दू बोला करती है मेरे घर के सामने छत पर अक्सर टहला

आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई

aasmaan se na utarega

आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई ऐ ज़मीं ढूँढ ले अब अपना मसीहा कोई, फिर दर ए दिल

दो जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया

do jahan ke husn

दो जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया इस सदी के शोर में इंसान आधा रह गया,

कहिए ऐसी बात जो दिल में लगा दे आग सी

kahiye aisi baat jo

कहिए ऐसी बात जो दिल में लगा दे आग सी क्या भला होगा किसी का दास्तान ए तूर

जिस ने बख़्शी है फ़ुग़ाँ उस को सुना भी न सकूँ

jis ne bakhshi hai

जिस ने बख़्शी है फ़ुग़ाँ उस को सुना भी न सकूँ कैसा नग़्मा है जिसे साज़ पे गा

किया हम ने जो उन से कुछ ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता

kiya ham ne jo

किया हम ने जो उन से कुछ ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता उन्हों ने भी दिया हम को जवाब आहिस्ता

ख़्वाबों की तरह गोया बिखर जाएँगे हम भी

khwabon ki tarah goya

ख़्वाबों की तरह गोया बिखर जाएँगे हम भी चुप चाप किसी रोज़ गुज़र जाएँगे हम भी, हम जैसे

साया ए ज़ुल्फ़ नहीं शोला ए रुख़्सार नहीं

saya e zulf nahin

साया ए ज़ुल्फ़ नहीं शोला ए रुख़्सार नहीं क्या तेरे शहर में सरमाया ए दीदार नहीं, वक़्त पड़

हम अहल ए आरज़ू पे अजब वक़्त आ पड़ा

ham ahal e aarzoo

हम अहल ए आरज़ू पे अजब वक़्त आ पड़ा हर हर क़दम पे खेल नया खेलना पड़ा, अपना