अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

ashaar mere yun to

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये

हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह

hum se bhaaga na

हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह हम ने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह,

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से

log kahte hai ki

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी

sau chaand bhi chamkenge

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी, उनसे यही

नये नये वायदों का नया नया बहाव आया है

naye naye waado ka

नये नये वायदों का नया नया बहाव आया है जनता को लुभाने खातिर कुछ नया उपाय आया है

ख़ुद से इतनी भी अदावत तो नहीं कर सकता

khud se itni bhi

ख़ुद से इतनी भी अदावत तो नहीं कर सकता अब कोई मुझ से मोहब्बत तो नहीं कर सकता,

मायूसी की कैफ़िय्यत जब दिल पर तारी हो जाती है

mayusi ki kaifiyat jab

मायूसी की कैफ़िय्यत जब दिल पर तारी हो जाती है रफ़्ता रफ़्ता दीन ओ दुनिया से बे ज़ारी

हम पर करेगा रहमतें परवर दिगार भी

hum par karega rahmaten

हम पर करेगा रहमतें परवर दिगार भी हालात अपने होंगे कभी साज़गार भी, तू ने भुला दी चाहतें

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है

samne rah kar na

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है इस कहानी में इज़ाफ़ी तज़्किरा मेरा भी है, बे

आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी

aahan me dhalti jayegi

आहन में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी फिर भी ग़ज़ल सुनाएगी इक्कीसवीं सदी, बग़दाद दिल्ली मास्को लंदन के दरमियाँ