जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में

जितने हरामखोर थे क़ुर्ब

जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे

आँख पर पट्टी रहे

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाह ए वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी

ये अमीरों से हमारी

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ?

शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं

shab e hizraan kee talawat se

शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं उसके अंदाज़ ए मुहब्बत से घबरा गया हूँ

कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया

kuch baat hai ki aaj khyal

कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया एक बार नहीं बल्कि बार बार आया, भूल चुका

न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे

na jaane kaisa jaadoo kar gai

न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे तेरे सिवा और किसी की तरफ़ अब देखा

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे

bhala gamo se kahan haar

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने

उदास एक मुझी को तो कर नही जाता

उदास एक मुझी को

उदास एक मुझी को तो कर नही जाता वह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता, वह

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?

भरोसा कैसे करे कोई

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? न रहा सत्ता का यकीं हमको, न सत्ता

अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है

अपने थके हुए दस्त

अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है जो माँगते नहीं रब से वो सब से माँगते