ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है

zulf o rukh ke saaye me zindagi guzaari hai

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़मगुसार

और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना

aur sab bhul gaye harf e sadakat likhna

और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं

apno ne wo ranz diya hai begaane yaad aate hai

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद

अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है

afsos tumhe kaar ke shishe ka hua hai

अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है,

आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह

aag hai faili hui kaali ghataaon ki tarah

आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह बद दुआएँ हैं लबों पर अब दुआओं की जगह, इंतिख़ाब

ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है

ye kis rashq e masiha ka maqaan hai

ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है ज़मीं याँ की चहारुम आसमाँ है, ख़ुदा पिन्हाँ है आलम

वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी

vatan nasib kahan apni qismate hongi

वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी जहाँ भी जाएँगे हम साथ हिजरतें होंगी, कभी तो साहिब ए दीवार

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता…

dil me rakhta hai na palako pe bithata hai mujhe

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे फिर भी एक शख्स में क्या क्या नज़र

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना…

hizr ke mausam me ye baarish ka barsana kaisa

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना कैसा ? एक सहरा में समन्दर का गुज़रना कैसा ?

ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना…

zulf angdaai chaand tabassum aaina gulab

ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना, गुलाब भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इन सब का शबाब, पेट के