दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना

दरियाँ का शोर मचाना

दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना वक़्त आने पर हर एक के हुनर ए खास

दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं

दिल के लूट जाने

दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं ये तमाशा सर ए बाज़ार ज़रूरी तो नहीं, मुझे

हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर

हमारे सब्र के दामन

हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर निगाह ए जोक तलब इतना बे क़रार न कर,

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं मेरे हमदम मेरी क़ायनात सिर्फ तुम से हैं, गैर महरम

फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है

फ़लक का हर सितारा

फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है जिसे शबनम सहर की शोख़ किरनों में पिरोती

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से

सब जल गया जलते

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से,

बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ

बेख़बर दुनिया को रहने

बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ दोस्तो मेरे दुखों को मुश्तहर करते हो क्यूँ ?

नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त

नहीं बदलता यहाँ कुछ

नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त नहीं बदलता यहाँ कुछ भी जुस्तजू से फ़क़त, मुझे यक़ीन

कभी फूलों कभी खारों से बचना

कभी फूलों कभी खारों

कभी फूलों कभी खारों से बचना कभी रक़ीब कभी यारों से बचना, जान बुझ कर धोखा न खा

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे धुल पड़ी कहीं किताबो में मिलेंगे, ज़फागर से किये वफ़ाओ में मिलेंगे