हिंदी कविता और ग़ज़लें

हिंदी कविता और ग़ज़लें

हिंदी कविता और ग़ज़लें हिंदी कविता और ग़ज़लें भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग

दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही

दर्द ख़ामोश रहा टूटती

दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही मेरी हर शाम तेरी याद की हमराज़ रही, शहर में जब भी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो

मेरे लबों पे उसी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी

जब मेरे होंठों पे

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी तेरी आँखों में भी थोड़ी सी नमी रह जाएगी, सरफिरा

जो शजर बे लिबास रहते हैं

जो शजर बे लिबास

जो शजर बे लिबास रहते हैं उन के साए उदास रहते हैं, चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया

ग़म इसका कुछ नहीं

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया ग़म ये है कि क़ातिलों में तेरा नाम

हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है

हमारी वजह ए ज़वाल

हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है हराम क्या है, हलाल क्या है ? सवाल

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही

बुग्ज़ ए इस्लाम में

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही यहाँ कितनो के क़िरदार गिरे है, सभी मुन्सफ़ गिरे, मनसब गिरे

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया

कितनी मोहब्बतों से पहला

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया मैं कुछ न जानता था सब कुछ मुझे सिखाया, अनपढ़ था और

नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का

नेक बच्चे दिल से

नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का बाप की उल्फ़त से बेहतर है ग़ज़ब उस्ताद का,