मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए

मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए
रूठे दुनिया से जो हम यार मनाने आए,

अच्छे दिन आए तो मैंने ये तमाशा देखा
मेरे दुश्मन भी गले मुझको लगाने आए,

आज मिल कर मेरे दुश्मन का पता पूछते हैं
मुझ से मिलने वो न मिलने के बहाने आए,

दर्द ओ ग़म और उदासी के सिवा कौन आता
जिन को भेजा था मेरे घर में ख़ुदा ने आए,

फूल ही फूल खिले जिन की बदौलत ऐ दोस्त
उन के हिस्से में न फूलों के ख़ज़ाने आए,

एधी वालों के सिवा कोई नहीं था उस का
लोग मुफ़्लिस का जनाज़ा न उठाने आए,

रो दिए वो भी मेरी मौत के बाद ऐ पुरनम
याद जब मेरी वफ़ाओं के फ़साने आए..!!

~पुरनम इलाहाबादी

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