हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है…

har shakhs ka jina yahan

हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है मुश्किल से मिले वो जो परेशान नहीं है, हर शख्स

हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे

har ek shakhs pareshan o dar badar saa lage

हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे ये शहर मुझको तो यारो कोई भँवर सा लगे,

रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर…

रोज़मर्रा वही सब ख़बर

रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर अब तो पत्थर हुआ ये ज़िगर देखिए, सड़के चलने लगी आदमी रुक

ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा…

zindagi ka bojh uthana padega

ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा गर ज़िन्दा हो तो दिखाना पड़ेगा, लगने लगे जो मसला ये ज़िन्दगी तो

लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ?

लेना देना ही क्या

लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ? सुख दुःख भी जब बाँटने हो दीवारों से, ज़िस्म

अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें…

ab zindagi pe ho gai bhari shararten

अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें तन्हाइयो ने छीन ली सारी शरारतें, होंठो के गुलिस्तान पे लाली

वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं…

wafa e wada nahi wada e digar bhi nahi

वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं वो मुझसे रूठे तो थे लेकिन इस क़दर भी

लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी…

लोग सह लेते थे

लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी अब तो मश्कूक हुई अपनी मिलन सारी भी, वार

कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ…

kuch qadam aur mujhe zism

कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ साथ लाया हूँ उसी को जिसे खोना है यहाँ,

तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा…

tere sath safar main kuch is tarah

तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा दूर हो कर भी महसूस तुम्हे हरदम करता रहा,