सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए

sookhi zamin ko yaad

सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए पलकों को आज बीते हुए पल भिगो गए, आँसू फ़लक

जिसकी ख़ातिर मैने दुनिया की तरफ़ देखा न था

jiski khatir maine duniya

जिसकी ख़ातिर मैने दुनिया की तरफ़ देखा न था वो मुझे यूँ छोड़ जाएगा कभी सोचा न था,

छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त

chha gaya mere muqaddar

छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त तू ने शानों पे जो गेसू को बिखेरा ऐ दोस्त,

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ

sadaqaton ko ye zidd

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ जो शय कहीं न मिले मैं कहाँ तलाश करूँ ?

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

jism ke gharaunde me

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है दिल में जब मोहब्बत की चाँदनी उतरती है, शाम के

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे

yahan jo zakhm milte

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे तुम्हारे शहर के सब लोग तो दुश्मन नहीं

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

jhuki jhuki see nazar

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं,

इतनी मुद्दत बाद मिले हो

itni muddat baad mile

इतनी मुद्दत बाद मिले हो किन सोचों में गुम फिरते हो ? इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते हो ?

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया

ae mohabbat tere anjaam

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया, यूँ तो हर

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही

hum ko kis ke

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी