कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता
Sad Poetry
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता
जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रखा है,
घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से, सज़ा
इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की ख़ुदा की ज़ात से मुश्किल है ज़ात आदमी की, नए
राहज़न आदमी रहनुमा आदमी बार हा बन चुका है ख़ुदा आदमी, हाए तख़्लीक़ की कार पर्दाज़ियाँ ख़ाक सी
अपनों को नहीं समझा अपना बेगाना समझ कर छोड़ दिया अफ़्सोस हक़ीक़त को तुम ने अफ़्साना समझ के
आरज़ू ,हसरत, तमन्ना, मुद्दआ कोई नहीं जब से तुम हो मेरे दिल में दूसरा कोई नहीं, बेवफ़ाई का
मेरे दर्द की तुझे क्या ख़बर है जिसे ख़बर कोई और है तू इलाज रहने दे चारागर मेरा
रखते हैं दुश्मनी भी जताते हैं प्यार भी हैं कैसे ग़म गुसार मेरे ग़म गुसार भी, अफ़्सुर्दगी भी
जान जब तक फ़िदा नहीं होती पूरी रस्म ए वफ़ा नहीं होती, शीशा टूटे तो होती है आवाज़