ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा

le chala jaan meri ruth ke jana

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा, अपने

नशा नशे के लिए है अज़ाब में शामिल

nasha nashe ke liye hai

नशा नशे के लिए है अज़ाब में शामिल किसी की याद को कीजे शराब में शामिल, हर एक

तन्हा हुए ख़राब हुए आइना हुए

tanha hue kharab hue

तन्हा हुए ख़राब हुए आइना हुए चाहा था आदमी बनें लेकिन ख़ुदा हुए, जब तक जिए बिखरते रहे

कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है

koi nahin hai aane wala

कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है आते जाते रात और दिन में कुछ

कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़

koi kisi ki taraf hai koi

कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़ कहाँ है शहर में अब कोई ज़िंदगी की तरफ़,

चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं

chahte mausami parinde hai

चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं घोंसले बन के टूट जाते हैं दाग़ शाख़ों

ज़ीस्त उनवान तेरे होने का

zist unwan tere hone ka

ज़ीस्त उनवान तेरे होने का दिल को ईमान तेरे होने का, मुझ को हर सम्त ले के जाता

हम ने जिस के लिए फूलों के जहाँ छोड़े हैं

hum ne jis ke liye

हम ने जिस के लिए फूलों के जहाँ छोड़े हैं उस ने इस दिल में फ़क़त ज़ख़्म ए

दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए

dil mohabbat me mubtila ho

दिल मोहब्बत में मुब्तला हो जाए जो अभी तक न हो सका हो जाए, तुझ में ये ऐब

ज़र्द मौसम के एक शजर जैसी

zard mausam ke ek sazar jaisi

ज़र्द मौसम के एक शजर जैसी सारी बस्ती है मेरे घर जैसी, जब बिगड़ता है वक़्त इंसाँ का