इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना

ishq gar hath chhudaye chhudane dena

इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना कार ए वहशत पे मगर आँच न आने देना, यूँ भी

सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की

sukhan ke shauq me tauhin harf ki nahi ki

सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की कि हम ने दाद की ख़्वाहिश में शाएरी नहीं

हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है

har ek shakl me surat nayi malal ki hai

हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है हमारे चारों तरफ़ रौशनी मलाल की है, हम अपने

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है

chup hai aagaaz me fir shor e azal padta hai

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है और कहीं बीच में इम्कान का पल पड़ता

मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है

mere siwa bhi koi giraftar mujh me hai

मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है या फिर मेरा वजूद ही बेज़ार मुझ में है, मेरी

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया

wo charag e jaan ki charag tha kahin rahgujar me bujh gaya

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते

majlis e gam na koi bazm e tarab kya karte

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब,

कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत

kath putli hai yaa jivan hai jite jaao socho mat

कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ

रात के बाद नए दिन की सहर आएगी

raat ke baad naye din ki sahar ayegi

रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी, हँसते हँसते कभी थक

मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं

mutthi bhar logo ke hathon me laakho ki taqdeeren hain

मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन